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[vc_row][vc_column width=”2/3″ css=”.vc_custom_1517567823880″][vc_column_text]क्रिसमस के दिन एक लंबे अरसे बाद बच्चों से मुलाकात हुई। ऐसा लग रहा है कि उनका हंसता, खिलखिलाता और मुस्कुराता चेहरा मेरी आंखों में घर कर गया है। हालांकि इस बीच सभी बच्चों का आपस में रूठने मनाने का सिलसिला भी जारी रहा, जो उस पल एक अलग ही आनंद दे रहा था।

एक और बात है जो इस बीच मेरे साथ निरंतर हो रही थी, वह था इन बच्चों का पुराना चेहरा रह रह के याद आना। यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह वही बच्चें हैं, जिनकों हमने कभी सड़कों पर अकेला घूमते हुए और धूल और गंदगी से सना देखा था और ले आए। आज उन्हीं बच्चों में बस 6-8 महीनों में कितना सलीका, कितनी तहजीब और कितनी रौनक थी। झलक, ख़ुशी, नैतिक, बिट्टू, तमन्ना, राहुल, प्रियांशु, अंजलि और इन जैसे और कई नाम जो अब अपनी पहचान पा रहे थे। सही दिशा में जा रहे थे। इनकी हर एक अदाएं अब ख़ुशी देने लग गईं थीं। आनन्द प्रस्फुटित हो रहा था। मेहनत रंग लाने लगी थी। सपना साकार हो रहा था। आखिर हो भी तो क्यों ना ? बच्चों का बचपन जो लौट आया था।

यही सपना तो देखा था ईस्टसन्स- गुडवर्क्स ने…..स्मृति ने…..लेकिन अभी रुकना नहीं है। अनवरत चलना है।….. सचमुच, आप सभी से मिल के बहुत अच्छा लगा। सभी को शुभकामनाएं और प्यार……..

श्रुति मिश्रा ( वरिष्ठ सह संपादक – पत्रिका समूह)

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