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आप जिस बच्चे को देख रहे हैं उसका नाम …आवेश हैं। आवेश चार साल का एक नटखट, चंचल, चुलबुला, समझदार, और होशियार बच्चा है।
हर माँ बाप की तरह आवेश के माँ बाप ने भी उसे लेकर बड़े बड़े सपने सजाएं हैं। इन्हीं सपनों को अंजाम देने की इच्छा से एकदिन उसकी माँ उसे लेकर हमारे पास आयीं।
आवेश के मम्मी पापा पेशे से माली हैं। पढ़े लिखे नहीं हैं लेकिन शिक्षा के महत्व को बखूबी जानते हैं। शायद इसीलिए अनेक कठिनाइयों के बावजूद उसे पढ़ाने का सोचा।
वह दिन आज भी अच्छी तरह से याद हैं मुझे जब पहली बार आवेश अपनी माँ के साथ गुड वर्क्स आया था। उस दिन उसकी माँ ने बड़ी उम्मीद से हमसे कहा….. मैम इसका ध्यान दीजिएगा। इसे खूब पढ़ाइए और अगर ना पढ़े तो डांट लगाइएगा। इसे बड़ा आदमी बना दीजिए। ये महज शब्द नहीं थे। ना उनके लिए और ना ही हमारे लिए।
आवेश हैं तो बच्चा लेकिन पूरे आत्मविश्वास के साथ हर कार्य करने की कोशिश करता है। आज उसमें काफी बदलाव देखा जा सकता है। एक दिन की ही बात है आवेश ने और बच्चों को जब “गुडआफ्टरनून मैम” बोलते हुए सुना तो खुद उसे बोलने की कोशिश करने लगा। अगले दिन जब वह आया तो “गूनानंनून मैम” बोला। सच बताऊं तो मुझे उन बच्चों के “गुड आफ्टरनून” से उतनी खुशी नहीं मिली जितनी आवेश के “गूनानंनून मैम” में मिली। जब कभी उसे प्रोत्साहित करने के लिए हम गिफ्ट या कुछ देते हैं तो वह बहुत खुश हो जाता और उस दिन उसकी खुशी उसके चेहरे पर छुट्टी होने पर दिखती है। जब वह बहुत प्यार से हँसते हुए हाथ हिलाते हुए बोलता है….बॉय मैम तो बस यही लगता है काश इस मुस्कान को कभी किसी की नज़र ना लगे।
अगर इसी तरह गरीब परिवारों के अन्य लोग भी शिक्षा के प्रति सजग हों तो न केवल उनके जीवनचर्या में बदलाव देखने को मिलेगा बल्कि वह दिन भी दूर नहीं होगा जब हमारे यह आवेश देश विदेश में अपना परचम लहराएं। यह सुनने में भी कभी आश्चर्य नहीं होगा कि एक माली का बेटा अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत ग़रीबी जैसे अभिशाप को मात देकर IAS और PCS बन गया।