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नया साल

पीछे छूटे कितने साल,
देखो आ गया फिर एक नया साल I
नयी उम्मीदें, नए सवाल,
क्या खोया , क्या पाया,
इन सब बातों का मायाजाल ।
कुछ चूक हुईं, जिनसे सीख ली हमने,
नहीं किया कोई मलाल I
कुछ अच्छे काम भी किए, जिसने और अच्छा करने को प्रेरित किया,
ताकि बना सकें हम कोई मिसाल I
साल दर साल लम्बी दूरी तय करनी है,
बहुत ज़िंदगियाँ सँवारनी हैं I
जरूरतें कम होती नहीं दिखतीं
सालों की मेहनत अगर एक बच्चे में थोड़ा विकास लाती है ,
तो सालों पहले वाले उस बच्चे के रूप में न जाने कितने और बच्चे दिख जाते हैं I
तब अपने उत्साह पर अल्पविराम लगा, हौसले का रूप देना ही पड़ता है ,
जब बीड़ा उठाया है कमल को कीचड़ से निकालने का ,
तो ढृढ़ होकर आगे बढ़ना ही पड़ता है I

अति चंचल बच्चे का कक्षा में शांति से बैठना,
महीने में एकाध बार नहाने वाले बच्चे का अब रोज़ नहा कर आना,
१-१० तक की गिनती भी ठीक से न जानने वाले बच्चे का २० तक पहाड़ा सुनाना,
कक्षा में चुपचाप रहने वाले बच्चे का कविता सुनाना,
बच्चों की ये सारी गतिविधियाँ पारितोषिक सी मालूम पड़ती हैं,
और स्वतः ही हमारे अंदर ऊर्जा का संचार करती हैं I

आप जैसे बुद्धिजीवियों से प्राप्त प्रोत्साहन हमारे ऊर्जा को,
हमारे अथक प्रयास में परिवर्तित करने में सहयोग करते हैं I
आप निरंतर प्रोत्साहित करते रहें और हम आगे चलते रहें I


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