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मुझे लिखना नहीं आता। मैं अपनी भावनाओं को कलमबद्ध नहीं कर पाती या यूं कहूँ तो मैं इसके लिए समय ही नहीं निकाल पाती। लेकिन पिछले दिनों दिवाली पर मिले एक छोटे से पैकेट ने मुझे स्नेह से इतना भर दिया कि मैं उसकी मिठास आप तक पहुंचाने के लिए बाध्य हो गई।
दिवाली के बाद अपने बच्चों से मिलने जब मैं गुडवर्क्स पहुंची तो बच्चों ने बड़े उत्साह से ऊंची ध्वनि में मुझे दीपावली की शुभकामनाएं दी। मैंने भी उन्हें गले लगाकर हमेशा ख़ुश रहने को कहा। बच्चे पूरी मस्ती में थे। उन्हें हंसता खेलता देख मैं मंत्रमुग्ध हुए जा रही थी। इसी बीच एक छोटी बच्ची मेरे पास आयी और धीमी आवाज़ में ‘हैप्पी दिवाली’ कहते हुए एक डब्बा मेरे सामने रख दिया। यह रागिनी थी। मैं अवाक रह गयी। रागिनी बेहद गरीब परिवार से है। मैंने पूछा यह क्या है ? उसने बोला, यह आपके लिए है मैम….सोहनपापड़ी की मिठाई। यह सुनते ही मैं क्रोधित हो गई। बिना कुछ सोचे उसे डांटने लगी। क्या जरूरत थी? फिजूल में पैसे खर्च कर दी। अपने लिए कुछ ले लेती। कहां से लायी इतने पैसे?
वह चुपचाप मुझे सुनती रही, फिर धीरे से बोली…ले लो मैम, बहुत मन से लायी हूँ। आप हमारे लिए कितना कुछ करती हो, क्या हम आपको एक मिठाई भी नहीं दे सकते? यह सुनते ही मेरी आँखें डबडबा गईं। उसने आगे बताया मैम पिछले कई महीनों से मैं इसके लिए पैसे इकठ्ठे कर रही थी।
मैं निःशब्द हो गयी। उस क्षण, उस भावना को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। यकीन मानिए यह मेरे जीवन की सबसे मीठी मिठाई थी जिसका स्वाद मैंने बिना चखे ले लिया था। मन से एक आवाज़ आयी….तुम्हारी हर दिवाली हमेशा जगमगाती और मीठी रहे मेरी बच्ची…..