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घनी धूप में जब बारिश हो

घनी धूप में जब अचानक बादल घिर आएं, हवा नरम रूप अख्तियार करने लगे तो एक जन मानस के मन में कैसे विचार आएँगे ? निश्चित तौर पर खुशनुमा हो रहे मौसम का आनंद उठाने का ही ख्याल सामान्यतः सबके मन में आएगा. लेकिन आज एक १० – १२ साल के बच्चे ने घिरते बादलों को देख जब मुझसे पूछा कि ” मैडम घर जाऊं ? ” स्वाभाविक सा प्रत्युत्तर था मेरा कि  ” अभी तो क्लास शुरू भी नहीं हुई तुम जाना क्यों चाहते हो ? ” उसने थोड़ा संकुचाते हुए बोला कि ” मैडम छत पर बिस्तर रखा है, वही उतारना है. ” इस असामान्य से उत्तर ने मेरा ध्यान इस ओर खींचा कि कैसे जरूरतें किसी की इच्छा अनिच्छा का निर्धारण करती हैं. आपका स्वाभाव, आपकी शख़्सियत काफ़ी हद तक आपकी परिस्थिति पर निर्भर करती है. एक बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए जो माहौल अपेक्षित है, उसका १० % भी इन बच्चों को मयस्सर नहीं. सोचें इतना उपेक्षित होने के बाद भी इनमें से अगर कोई बच्चा इतना ज़िम्मेदार होता है तो कैसा होगा इनका स्वरुप अगर इन्हें भी बाकी बच्चों की तरह उचित परवरिश मिले ? यह हमारी – आपकी संयुक्त ज़िम्मेदारी है कि इस अनछुए वर्ग के प्रति संवेदनशील हों और इनके बेहतर भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करें क्योंकि ये भी उसी सृष्टिकर्ता की रचना हैं जिसकी हम. इन्हें भी जीवन को बेहतर तरीके से जीने का पूरा हक़ है और ये हम सबका दायित्व है कि ऐसा करने में हम उनकी मदद करें.                                                                                                                                         हमसे जितना बन पड़ता है , हम इनका मार्गदर्शन करते हैं, प्रेरित करते हैं उज्जवल भविष्य के लिए कठिन मेहनत करने को, शिक्षा की महत्ता को समझाने का एक भी प्रयास हम नहीं छोड़ते. बस यही आशा है कि इनके भविष्य को बेहतर बनाने का जो सपना हमने देखा है वो साकार हो जाए.


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aalok
aalok
2 years ago

Great effort by you all and it is highly motivating.

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